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हमारे समाज का रितरिवाज एवं परंपराओं का वैज्ञानिक महत्व।

हमारे समाज के रिति रिवाज एवम् परम्पराओं का वैज्ञानिक महत्व । आदरणीय एवम् सम्मानित मित्रों प्रणाम एवम् नमस्कार ।🌹🌹🌷🌷 Posted by : L.S. Rajbhar.   05/05/2020         मित्रों हमें हमारे समाज को ध्यान, एवम् सामाजिक सोच की बहुत आवश्यकता है ।हमारी एवं आप सभी लोगों की जिम्मेदारी है कि हम अपने समाज का भविष्य सुन्दर , सुखदायी कैसे हो । यह सब हम सभी लोगों के सोच पर निर्भर करता है। भारतीय संस्कृति मे रीति-रिवाज़ और परम्पराओं का वैज्ञानिक महत्त्व है.जैसे हमारे बुजुर्ग प्रातः उठकर अपने दोनों हाथों को देखते हैं और उसमें ईश्वर का दर्शन करते हैं.धरती पर पैर रखने से पहले धरती माँ को प्रणाम करते हैं क्योंकि जो धरती माँ धन-धान्य से परिपूर्ण करती है ,हमारा पालनपोषण करती है,उसी पर हम पैर रखते हैं.इसीलिए धरती पर पैर रखने से पहले उसे प्रणाम कर उससे माफ़ी मांगतेहैं.अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त में ऐसा प्रसंग  है. सूर्य ग्रहण  के समय घर से बाहर  न निकलने की परंपरा के पीछे वैज्ञानिक तथ्य छिपा हुआ है .दरअसल सूर्य ग्रहण के समय सूर्य से बहुत ही हानिकारक किरणें निकलती हैं जो हम...

विरांगना महारानी बल्लरी देवी राजभर जी की जीवन गाथा ।

महारानी वल्लरी देवी राजभर जी जीवन गाथा। आदरणीय एवं सम्मानित प्रणाम मित्रों नमस्कार । 08/03/2020 . आज महिला दिवस के अवसर पर भर / राजभर की विरगांना महारानी बल्लरी देवी राजभर जी को शत् शत् नमन। मित्रों हमारे भर/ राजभर समाज में अनेक महायोद्धा एवं विरांगनाएं पैदा हुए थी। जिन्होंने भर/ राजभर जाति का नाम रोशन किया था। उनमें से एक विरांगना महारानी बल्लरी देवी राजभर भी हैं। जिन्हें राजभर समाज के इतिहास के पन्नों पर अजर अमर कर दिया है।11 वीं सदी के नायक वीर सारोमणि सम्राट महाराजा सुहेलदेव की राजमहिषि का नाम वल्लरी देवी राजभर  थी। महारानी वल्लरी देवी के जीवन वृतान्त के विषय में इतिहासविदो ने अपनी लेखनी मौन रखी है। लेखक श्री यदूनाथप्रसाद श्रीवास्त्व एडवोकेट की पुस्तक “भाले सुल्तान ” ही एकमात्र ऐसा अभिलेख प्राप्त हुआ है जो उनके जीवन परिचय पर कम ,उनके अदम्य साहस और शौर्य पर ज्यादा प्रकाश डालती है। पुस्तक “भाले सुल्तान” का सारांश आपके सामने प्रस्तुत है। 11 वीं सदी में जब महमुद गजनवी एक विशाल सेना के साथ भारत पर आक्रमण किया तो उस समय भारत के तमाम राजा आपसी वैमनस्य के कारण आपस में लड़ते भिड़ते कमजोर ...

विरांगना महारानी कुन्तादेवी राजभर जी की जीवन गाधा।

विरागाँना महारानी कुन्ता देवी राजभर की पराक्रम की जीवन गाथा । आदरणीय एवम् सम्मानित मित्रों प्रणाम , नमस्कार ः🌸🌸🌸🌸🌸🌹🌹🌿🌷🌷🌷🌹🌹 Posted  by:   Lalsuprasad S. Rajbhar.  08/03/2020  आज महिला दिवस के अवसर पर हमारे भर / राजभर समाज की महिला विरांगना महारानी कुन्ती देवी जी शत् शत् नमन।विरागाँना महारानी कुन्ता देवी राजभर एक महान महायोद्धा एवं विरांगना महारानी थीं।जिन्होंने मुगल मुसलमानों के छक्के छुड़ा लियें थे।  हमारे राजभर समाज में  रानी लक्ष्मीबाई के जैसे महारानी कुन्ता देवी राजभर, महारानी बल्लरी देवी राजभर जैसी विरागाँना लड़ाकू, शूरवीर , आदर्श नारियों की वीरगाथा इतिहास में मिलता है । महारानी कुन्ता देवी राजभर की जीवनगाथा प्रस्तुत है. 🌹🌸🌱🌿🌿🌺🌺   भारतीय समाज में नारियों का स्थान सदैव सम्मान पूर्ण रहा है / भारतीय नारी ने रसोई घर एवं रनिवास से लेकर रणभूमि तक का दायित्व बखूबी निभाया है / यद्यपि भारतीय मनीषियों ने नारी को  पुरुष का अर्द्धांग  कहा है किन्तु सच तो यह है पुरुष की सर्वांग रचना ही नारी के गर्भ में होती है / पुरुष अधर है और ...

क्षत्रपति शिवाजी महाराज की जीवन गाथा।

शिवाजीमहाराज की जीवन गाथा। मराठा साम्राज्य के संस्थापक। आदरणीय एवं सम्मानित मित्रों प्रणाम, नमस्कार। Posted by: L. S. Rajbhar. 19/02/2020.  19 फरवरी 1630 ई.के क्षत्रपति शिवाजी महाराज जी का जन्म शिवनेरी जुन्नर तालुका पुणे महाराष्ट्र मे हुआ था।छत्रपती शिवाजी महाराज (1630-1680 ई.) भारत के एक महान राजा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने 1674 ई. में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। उन्होंने कई वर्ष औरंगज़ेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया। सन् 1674 में रायगढ़ में उनका राज्यभिषेक हुआ और वह "छत्रपति" बने।छत्रपती शिवाजी महाराज ने अपनी अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों कि सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया। उन्होंने समर-विद्या में अनेक नवाचार किये तथा छापामार युद्ध (Gorilla War) की नयी शैली (शिवसूत्र) विकसित की। उन्होंने प्राचीन हिन्दूराजनीतिक प्रथाओं तथा दरबारी शिष्टाचारों को पुनर्जीवित किया और फारसी के स्थान पर मराठी एवं संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया। छत्रपति शिवाजी महाराजछत्रपति Great King of the worldशासनावधि१६७४–१६८०राज्याभिषेक६,जुन,१६७४पूर्ववर...

Maharaja Veersen Bharashiv Rajbhar Biography

Maharaja Veersen Bharashiv Rajbhar .महाराजा वीरसेन भारशिव राजभर ।🌷🌷🌹🌹 Posted  by:  Lalsuprasad S. Rajbhar . 25/01/2020  Respected Dears All friends Pranam, Namaskar .   Mathura Naresh Maharaja Veersen Bharishiv Rajbhar was the supreme devotee of Shiva. He was Shiva himself, therefore, he was counted in the eleventh Rudra and in Mahapuraan he was known as Veerabhadra. Maharaj Veersan used to wear Bharishiv Shivling. They could not bear the insult of Lord Shiva. Wherever Maheshwar Shiva was neglected in the auspicious work of Yajna, Maharaj Veerasan Bharishiv or his servants demolished that sacrifice. The proof of the sacrifice of the sacrifice of Prajapati Daksh is evidence. Due to this tendency, Vaishnav started having a deep hostility towards Lord Shiva, and started planning for the destruction of Bharashiv  Whenever the Vaishnavas got the opportunity, they tried to knock down the beats at the force of deceit. Not only this, but also for the destruction of ...

महाराजा बिजली राजभर जी की जीवन गाथा।

महाराजा बिजली राजभर ।लड़ेंगें हम जीतेंगे हम। Posted by: Lalsuprasd S. Rajbhar. 25/01/2020. महाराजा बिजली राजभर मित्रों इतिहास साक्षी है कि शुद्र कभी राजा नहीं हुए। फिर ये सुअर पालने वाले पासी राजा कैसे हुए?  महाराजा बिजली पासी नहीं भर थे। ये पासी समाज के लोग जबरदस्ती हमारे  भर/ राजभर समाज के महापुरुषों को अपना बता कर कब्जा करना चाहते है ।भर / राजभर  एक बहादुर क्षत्रिय राजपूत जाति है। जबकि पासी जाति को उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है । पासी जाति पहले सुअर पालन करने का कार्य करते थे। फिर पासी समाज के राजा कैसे हुए । कुछ राजनीतिक दल हमारे राजभर समाज के साथ गद्दारी करके पासी समाज का साथ दे रहे हैं।बारहवीं शताब्दी राजभर राजाओं के साम्राज्य के लिए बहुत अशुभ साबित हुई। इसी शताब्दी के अन्तिम वर्षों में अवध के सबसे शक्तिशाली राजभर महाराजा बिजली वीरगति को प्राप्त हुए थे। सन् 1194 ई. में इससे पहले राजा लाखन राजभर भी वीरगति को प्राप्त हुए। महाराजा बिजली राजभर की माता का नाम बिजना था, इसीलिए उन्होंने सर्वप्रथम अपनी माता की स्मृति में बिजनागढ की स्थापना की थी जो कालां...

साइमन कमीशन अंग्रेजों का काला कानून।

साइमन कमीशन अँग्रेज़ो का काला कानून । आदरणीय एवं सम्मानित मित्रों प्रणाम, नमस्कार । Posted by: L. S. Rajbhar. 20/01/2020 साइमन कमिशन अँग्रेज़ो का काला कानून था । जिसमेँ सभी सदस्य अँग्रेज थे । केवल एक मात्र बाबा साहेब आँबेडकर को छोड़कर ।साइमन आयोग सात ब्रिटिश सांसदो का समूह था, जिसका गठन 1927 में भारत में संविधान सुधारों के अध्ययन के लिये किया गया था। इसे साइमन आयोग (कमीशन) इसके अध्यक्ष सर जोन साइमन के नाम पर कहा जाता है। साइमन कमीशन के सुझाव। साइमन कमीशन की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि- (१) प्रांतीय क्षेत्र में विधि तथा व्यवस्था सहित सभी क्षेत्रों में उत्तरदायी सरकार गठित की जाए। (२) केन्द्र में उत्तरदायी सरकार के गठन का अभी समय नहीं आया। (३) केंद्रीय विधान मण्डल को पुनर्गठित किया जाय जिसमें एक इकाई की भावना को छोड़कर संघीय भावना का पालन किया जाय। साथ ही इसके सदस्य परोक्ष पद्धति से प्रांतीय विधान मण्डलों द्वारा चुने जाएं।[1] विरोध और लाला लाजपत राय की मृत्यु। कमीशन के सभी सदस्य अंग्रेज (केवल बाबा साहब अम्बेडकर को छोड़कर) थे जो भारतीयों का बहुत बड़ा अपमान था। चौरी चौरा की घटना के बाद असहय...