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मकर संक्रांति हिन्दू धर्म का प्रमुख त्यौहार

मकर संक्रांति , हिन्दू धर्म का प्रमुख त्यौहार। आदरणीय एवं सम्मानित मित्रों प्रणाम, नमस्कार। Posted by :  Lalsuprasad S. Rajbhar 14/01/2022.🌹🌹🌷🌷 आप सभी मित्रजनों को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं ।मकर संक्रान्ति (मकर संक्रांति) भारत का प्रमुख पर्व है। मकर संक्रांति (संक्रान्ति) पूरे भारत और नेपाल में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है, इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशिमें प्रवेश करता है।,   हिन्दूतिथिपौष मास में सूर्य के मकर राशि में आने पर मकर संक्रांति मनाया जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं, यह भ्रान्ति है कि उत्तरायण भी इसी दिन होता है। किन्तु मकर संक्रान्ति उत्तरायण से भिन्न है। मकर संक्रान्ति के विविध रूप। मकर संक्रान्ति के अवसर पर तिलगुड़ खाने-खिलाने की परम्परा ह

महाराजा डलदेव राजभर का रक्त रंजीत इतिहास।

महाराजा डलदेव राजभर जी का रक्त रँजित इतिहास । Posted by :  ललसूप्रसाद यस. राजभर । 29/03/2021        मित्रों होली   अनेक प्रकार के रंगों का त्योहार है।होली मनाने में बुराई क्या है। राजभर समाज को होली मनाना चाहिए या नहीं मनाना चाहिए ? होली मनाना चाहिए।आज कौन चार औरतें रख रहा है ? केवल मुसलमान लोग ही चार औरतें रखते हैं ।  हम लोग होली मनाते आ रहे हैं एवं होली मनाते रहेंगे । बुराई होली के त्यौहार मे नही है । बुराई मदिरा सेवन , शराब एवं नशे का है । इसे राजभर समाज से दूर करना चाहिए । इतिहास के अनुसार ग्यारहवी सदी में उत्तर भारत का लगभग पूरा क्षेत्र श्रावस्ती  सम्राट सुहेलदेव राजभर के राज्य में था परन्तु बारहवी सदी आते आते मुसलमानों के आतंक से भरो की राज्य व्यवस्था काफी प्रभावित हुई । यहाँ तक कि हरदोई के भर  राजा  हरदेव को मुसलमानों की मदद से मुसलमानों ने पराजित किया तथा जबरन भरो को मुसलमान बनाने का अभियान छेड़ दियाI I उन्हें जबरन धर्म परिवर्तनके लिए बाध्य किया गया  I इसका बिरोध करने पर भरो और अन्य हिन्दू जातियों का खुलेयाम  कत्ले आम किया गया और भरो को राजनैतिक, आर्थिक तथा धार्मिक यातनाओ का साम

भर/राजभर शासक महाराजा सुहेलदेव राजभर जी की जीवन गाथा।

भर/ राजभर शासक।  वीर शिरोमणि हिन्दू राष्ट्र रक्षक चक्रवर्ती श्रावस्ती सम्राट  भर / राजभर कुल गौरव  महाराजा सुहेलदेव राजभर जी का पराक्रम गाथा।🌹🌹🌿🌿🌷🌷 आदरणीय एवं सम्मानित मित्रो प्रणाम, नमस्कार। Posted by: Lalsuprasad S. Rajbhar. 16/02/2021 मित्रों  महाराजा सुहेलदेव राजभर जी का जन्म बंसत पंचमी को 1009 ई. मे हुआ था ।आज दिनांक 16 फरवरी2021 बसंत पंचमी के दिन 1012 वीं जयंती है ।10 जून 1034 मे चक्रवर्ती श्रावस्ती सम्राट हिंदू राष्ट्र रक्षक महाराजा सुहेलदेव राजभर जी ने सय्यद  सालार मसूद  की डेढ़ लाख सेना को गाजर मूली की  तरह अपने तलवारों से काट दिये थे । राष्ट्र वीर महाराजा सुहेलदेव राजभर जी ने विदेशी आक्रांता सैय्यद सालार मसूद को आज 10 जून  1034 ई.के दिन अपनी तलवारों से सिर कलम कर दिये थे । इसलिए आज 10 जून 1034 ई. के दिन विजय दिवस के रुप मे सभी भारत वासी मनाने लगे। आज विजय दिवस का दिन है। मित्रों हिन्दू राष्ट्र रक्षक वीरशिरोमणी श्रावस्ती सम्राट चक्रवर्ती महाराजा सुहेलदेव राजभर जी की 986 वीं विजय दिवस  पर आप सभी देशवासियों एवं मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बहुत बहुत बधाई।  बसंत पंचमी क

महाराजा लाखन भर।

हिन्दूत्ववादी वीर शिरोमणि महाराजा लाखन राजभर। आदरणीय एवं सम्मानित मित्रों प्रणाम, नमस्कार। Posted by. : Lalsuprasad S. Rajbhar 08/02/2021.   मित्रों इतिहास साक्षी है कि शूद्र कभी राजा नहीं हुए।फिर भी ये सुअर पालने वाले पासी राजा कैसे हो गए ?  ये बहुत बड़ा प्रश्न है? ये पासी समाज के लोग हमारे महापुरूषों को  अपना बताकर कब्जा करना चाहते हैं।महाराजा लाखन पासी नहीं भर जाति के थे। पासी समुदाय के लोग जबरदस्ती हमारे भर / राजभर समाज के महापुरुषों को अपना बता रहे हैं। भर / राजभर जाति एक बहादुर लड़ाकू राजपूत जाति है। जबकि पासी जाति को उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है। पासी जाति सुअर पालन का कार्य करते थे।फिर पासी समुदाय के लोग राजा कैसे हो गए?? कुछ राजनीतिक दल हमारे भर/ राजभर समाज के साथ गद्दारी करके पासी समुदाय का साथ दे रहे हैं। 10 वी सदी भर / राजभर राजाओं के लिए बहुत अशुभ शाबित हुई।  इसी  10 वी शताब्दी के अन्तिम वर्षों में  लखनऊ के सबसे शक्तिशाली राजभर महाराजा लाखन  वीरगति को प्राप्त हुए। लखनऊ का नाम पहले लखनपुर था। लखनऊ को महाराजा  लाखन राजभर के नाम से बसाया गया था। आज जिस टील

महाराजा लाखन राजभर।

हिन्दूत्ववादी वीर शिरोमणि महाराजा लाखन राजभर। आदरणीय एवं सम्मानित मित्रों प्रणाम, नमस्कार। Posted by. : Lalsuprasad S. Rajbhar 08/02/2021.   मित्रों इतिहास साक्षी है कि शूद्र कभी राजा नहीं हुए।फिर भी ये सुअर पालने वाले पासी राजा कैसे हो गए ?  ये बहुत बड़ा प्रश्न है? ये पासी समाज के लोग हमारे महापुरूषों को  अपना बताकर कब्जा करना चाहते हैं।महाराजा लाखन पासी नहीं भर जाति के थे। पासी समुदाय के लोग जबरदस्ती हमारे भर / राजभर समाज के महापुरुषों को अपना बता रहे हैं। भर / राजभर जाति एक बहादुर लड़ाकू राजपूत जाति है। जबकि पासी जाति को उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है। पासी जाति सुअर पालन का कार्य करते थे।फिर पासी समुदाय के लोग राजा कैसे हो गए?? कुछ राजनीतिक दल हमारे भर/ राजभर समाज के साथ गद्दारी करके पासी समुदाय का साथ दे रहे हैं। 10 वी सदी भर / राजभर राजाओं के लिए बहुत अशुभ शाबित हुई।  इसी  10 वी शताब्दी के अन्तिम वर्षों में  लखनऊ के सबसे शक्तिशाली राजभर महाराजा लाखन  वीरगति को प्राप्त हुए। लखनऊ का नाम पहले लखनपुर था। लखनऊ को महाराजा  लाखन राजभर के नाम से बसाया गया था। आज जिस टील

महाराजा बिजली राजभर जी जीवन गाथा ।लड़ेंगे हम जीतेंगे हम।

महाराजा बिजली राजभर ।लड़ेंगें हम जीतेंगे हम। Posted by: Lalsuprasd S. Rajbhar. 21/01/ 2021 महाराजा बिजली राजभर मित्रों इतिहास साक्षी है कि शुद्र कभी राजा नहीं हुए। फिर ये सुअर पालने वाले पासी राजा कैसे हुए?  महाराजा बिजली पासी नहीं भर थे। ये पासी समाज के लोग जबरदस्ती हमारे  भर/ राजभर समाज के महापुरुषों को अपना बता कर कब्जा करना चाहते है ।भर / राजभर  एक बहादुर क्षत्रिय राजपूत जाति है। जबकि पासी जाति को उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है । पासी जाति पहले सुअर पालन करने का कार्य करते थे। फिर पासी समाज के राजा कैसे हुए । कुछ राजनीतिक दल हमारे राजभर समाज के साथ गद्दारी करके पासी समाज का साथ दे रहे हैं।बारहवीं शताब्दी राजभर राजाओं के साम्राज्य के लिए बहुत अशुभ साबित हुई। इसी शताब्दी के अन्तिम वर्षों में अवध के सबसे शक्तिशाली राजभर महाराजा बिजली वीरगति को प्राप्त हुए थे। सन् 1194 ई. में इससे पहले राजा लाखन राजभर भी वीरगति को प्राप्त हुए। महाराजा बिजली राजभर की माता का नाम बिजना था, इसीलिए उन्होंने सर्वप्रथम अपनी माता की स्मृति में बिजनागढ की स्थापना की थी जो कालांतर में बिजनौरग

शैव धर्म सबसे प्राचीन धर्म है।

शैव धर्म सबसे प्राचीन धर्म है। आदरणीय एवम् सम्मानित मित्रों प्रणाम , नमस्कार । Posted by : Lalsuprasad S. Rajbhar 29/11/2020. मित्रों शैव धर्म सबसे प्राचीन धर्म है । आज भी शैव धर्म हिन्दू धर्म का सँप्रदाय माना गया है । जो आज भी हिन्दू धर्म के लोग शैव धर्म को मानने है । जिसे आज हिन्दू धर्म कहा जाता है ।भगवान शिव  एवं उनके अवतारों को मानने वालोंको मानने वालोँ को शैव कहते हैं । शैव मे शाक्त, नाथ, दशनामी, नाग, आदि उपसँप्रदाय हैं । इसलिए भर/ राजभर को नागवंशी भी कहते हैं । क्योंकि उस समय भर/ राजभर जँगलो मे भगवान शिव का लिँग बनाकर अपने सिर के ऊपर रखकर पूजा अर्चना करते थे । आज भी. भर./ राजभर शिवलिंग की पूजा अर्चना करते हैं । बौद्ध धर्म से भर/ राजभर कभी कोई नाता नहीं था ।हमारे राजभर का धर्म पहले भी हिन्दू था । आज भी हिन्दू है । इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश करने से राजभर हिन्दू से बौद्ध अभी नहीं बनेंगे । आज राजभर जाति को ओबीसी मे रखा है । जिसमें यादव, गुप्ता, तेली, एवम् बनिया , जैसवाल, यानी वैश्य की कटेगरी मे रखा गया है । शुद्रों मे केवल दलितों को sc, st. मे रखा गया है ।हमेँ कोई भी इतिहास पढ़ाने की